प्रश्न 1. चुंबक लोहे की बनी वस्तु को क्या करता है ?
उत्तर - चुंबक लोहे की बनी वस्तु को अपनी और आकर्षित करता है
प्रश्न 2. चुंबक का ध्रुव से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर - चुंबक के सिरे के निकट का वह बिंदु जहां चुंबक का आकर्षण बल अधिकतम होता है ध्रुव कहलाता है
प्रश्न 3. चुंबक में कितने ध्रुव होते हैं ?
उत्तर - दो ( उत्तर ध्रुव तथा दक्षिणी ध्रुव )
प्रश्न 4. चुंबक का उत्तरी ध्रुव और दक्षिणी ध्रुव से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर- चुंबक का वह ध्रुव जो उत्तर दिशा की ओर हो जाता है, उत्तर ध्रुव (north pole) तथा जो ध्रुव दक्षिण दिशा की ओर हो जाता है, दक्षिण ध्रुव (south pole) कहलाता है।
प्रश्न 5. चुंबकीय अक्ष किसे कहते हैं ?
उत्तर - दोनों ध्रुवों को मिलानेवाली रेखा को चुंबकीय अक्ष (magnetic axis) कहा जाता है।
प्रश्न 6. सजातीय चुंबकी एक दूसरे को क्या करते हैं ?
उत्तर - सजातीय चुंबकीय ध्रुव एक-दूसरे को प्रतिकर्षित (repel) करते हैं
प्रश्न 7. विजातीय चुंबकीय एक दूसरे को क्या करते हैं ?
उत्तर - विजातीय चुंबकीय ध्रुव एक-दूसरे को आकर्षित (attract) करते हैं।
प्रश्न 8. चुंबकीय पदार्थ से आप क्या समझते हैं ?
उत्तर- वैसे पदार्थ जिन्हें चुंबक आकर्षित करता है अथवा जिनसे कृत्रिम चुंबक बनाए जा सकते हैं, चुंबकीय पदार्थ (magnetic substances) कहलाते हैं; जैसे-लोहा, कोबाल्ट, निकेल तथा उनके कुछ मिश्रधातु।
प्रश्न 9. अचुंबकीय पदार्थ किसे कहते हैं ?
उत्तर - वैसे पदार्थ जिन्हें चुंबक आकर्षित नहीं करता, अचुंबकीय पदार्थ कहलाते हैं; जैसे-काँच, कागज, प्लैस्टिक, पीतल आदि।
प्रश्न 10. सरल कंपास क्या होता है समझाकर लिखें ?
उत्तर - प्रयोगशाला में चुंबक तथा उनके प्रभावों का अध्ययन करने के लिए एक सरल कंपास सूई का उपयोग किया जाता है। इसमें एक हलका, सूई के आकार जैसा एक चुंबक होता है, जो एक अचुंबकीय पदार्थ से बने वृत्ताकार बॉक्स के आधार पर लगे ऊर्ध्वाधर धुराग्र (pivot) पर क्षैतिज तल में घूम सकता है। सूई की स्थिति के अवलोकन के लिए बॉक्स का ढक्कन काँच का बना होता है।
चुंबकीय क्षेत्र एवं चुंबकीय क्षेत्र-रेखाएँ जब किसी कंपास सूई के निकट कोई चुंबक या चुंबकीय पदार्थ नहीं होता है, तो सूई दक्षिण-उत्तर दिशा में स्थिर रहती है। जब किसी चुंबक को सूई के निकट लाया जाता है तब साधारणतः सूई विक्षेपित हो जाती है। ऐसा इसलिए होता है कि चुंबक अपने आस-पास चुंबकीय क्षेत्र (magnetic field) उत्पन्न करता है और यह क्षेत्र चुंबकीय सूई पर चुंबकीय बल (magnetic force) लगाता है जिससे सूई विक्षेपित हो जाती है। सूई के चुंबकीय अक्ष की दिशा (उसके दक्षिण ध्रुव S से उत्तर ध्रुव N तक) से उस स्थान के चुंबकीय क्षेत्र की दिशा मिलती है। चुंबकीय क्षेत्र को चुंबकीय क्षेत्र-रेखाओं (magnetic field lines) द्वारा दर्शाया जाता है। चुंबक के चारों ओर उसके चुंबकीय क्षेत्र में क्षेत्र-रेखाएँ
क्षेत्र-रेखाओं के गुण-
1. किसी चुंबक के चुंबकीय क्षेत्र में क्षेत्र-रेखाएँ एक संतत बंद वक्र (continuous closed loops) हैं और वे चुंबक के उत्तरी ध्रुव से निकलकर दक्षिणी ध्रुव में प्रवेश करती हैं और पुनः चुंबक के भीतर होती हुई उत्तरी ध्रुव पर वापस आ जाती हैं।
2. ध्रुवों के समीप क्षेत्र-रेखाएँ घनी होती हैं, परंतु ज्यों-ज्यों उनकी दूरी ध्रुवों से बढ़ती जाती हैं, उनका घनत्व घटता जाता है।
3. क्षेत्र-रेखा के किसी बिंदु पर खींची गई स्पर्शरेखा (tangent) उस बिंदु पर उस क्षेत्र की दिशा बताती है।
* धारावाही चालक अपने चारों ओर चुंबकीय क्षेत्र उत्पन्न करता है।
* मैक्सवेल के दक्षिण-हस्त नियम के अनुसार, यदि धारावाही चालक को दाएँ हाथ की मुट्ठी में इस प्रकार पकड़ा जाए कि अँगूठा धारा की दिशा की ओर संकेत करता हो तो हाथ की अन्य अँगुलियाँ चुंबकीय क्षेत्र की दिशा व्यक्त करती हैं।
* सीधी धारा के कारण चुंबकीय क्षेत्र-रेखाएँ वृत्ताकार होती हैं जिनके केंद्र धारावाही तार पर होते हैं।
* विद्युतरोधित चालक तार की लंबी बेलनाकार कुंडली को परिनालिका कहते हैं। परिनालिका जिस पदार्थ पर लिपटी होती है, उसे क्रोड कहा जाता है।
* किसी धारावाही चालक पर चुंबकीय क्षेत्र बल लगाता है।
* एलेमिंग का वाम-हस्त नियम बताता है कि यदि बाएँ हाथ का अंगूठा, तर्जनी और मध्यमा परस्पर समकोणिक रखे गए हों तथा तर्जनी क्षेत्र की दिशा में एवं मध्यमा धारा की दिशा में हो तो अँगूठा बल की दिशा का संकेत करेगा।
* विद्युत मोटर विद्युत ऊर्जा को यांत्रिक ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
* जब कभी कुंडली और किसी चुंबक के बीच आपेक्षिक गति होती है तब कुंडली में विद्युत-धारा प्रेरित होती है। इस प्रभाव को विद्युत-चुंबकीय प्रेरण कहते हैं।
* फ्लेमिंग का दक्षिण-हस्त नियम बताता है कि यदि दाहिने हाथ के अँगूठा, तर्जनी और मध्यमा को परस्पर समकोणिक रखते हुए तर्जनी चुंबकीय क्षेत्र की दिशा को संकेत करे और अँगूठा गति की दिशा में हो तो मध्यमा प्रेरित धारा की दिशा का संकेत करेगी।
* विद्युत जनित्र या डायनेमो यांत्रिक ऊर्जा को (विद्युत-चुंबकीय प्रेरण द्वारा) विद्युत ऊर्जा में परिवर्तित करता है।
* विद्युत-शक्ति संचरण में ऊर्जा की क्षति को कम करने के लिए उच्च विभवांतर का व्यवहार होता है।
* घरेलू परिपथ में उपकरण विद्युन्मय तार और उदासीन तार के बीच समांतरक्रम में जुड़े होते हैं।
* स्विच तथा फ्यूज हमेशा विद्युन्मय तार (live wire) में लगाए जाते हैं।
* विद्युत परिपथों की अतिभारण तथा लघुपथन से बचाव के लिए सबसे आवश्यक सुरक्षा युक्ति फ्यूज है।
बहुत जल्द इस पोस्ट को पूरा कर दिया जाएगा......
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