प्रश्न 1. कुछ प्राकृतिक संसाधनों के नाम लिखें ?
उत्तर - कुछ प्राकृतिक संसाधनों जैसे - वायु , जल, स्थल की उपयोगिता , सूर्य , कोयला , पेट्रोलियम , वन , हमारे चारों ओर की भूमि , इत्यादि
प्रश्न 2. क्योटो प्रोटोकॉल से आप क्या समझते हैं इसकी व्याख्या करें ?
उत्तर - 1997 में जापान के क्योटो (Kyoto) शहर में भूमिगत ताप वृद्धि को रोकने के लिए एक अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन आयोजित किया गया | इस सम्मेलन में विश्व के 141 देशों ने भाग लिया | और क्यूटो प्रोटोकॉल के अनुसार सभी औद्योगिक देशों को 2008 से 2012 तक के 5 वर्षों की अवधि में 6 प्रमुख ग्रीन हाउस गैसों (GHG) के उत्सर्जन के स्तर में 1990 के स्तर से कमी लाने का लक्ष्य निर्धारित किया गया |
क्योटो प्रोटोकॉल का लक्ष्य है कि ग्रीन हाउस गैसें छोड़ने वाली तकनीकों का उपयोग कम किया जाए
* मानव तथा पर्यावरण के मध्य संबंध सुधार की प्रक्रिया ही पर्यावरण प्रबंधन है।
* क्योटो प्रोटोकॉल कार्बन डाइऑक्साइड के उत्सर्जन के स्तर में कमी लाने के उद्देश्य से बनाया गया था।
* 1992 में केद्रीय मोटर वाहन अधिनियम के अंतर्गत वाहन निर्माताओं के लिए उत्सर्जन मानदंड जैसे--यूरो-1 तथा 1995 में यूरो-2 लागू किया गया था।
* ऋषिकेश से कोलकाता तक गंगा नदी कम स्वच्छ करने के उद्देश्य से गंगा कार्यान्वयन योजना की शुरुआत की गई थी।
* जल में उपस्थित मल के कोलिफार्म सूक्ष्मजीवों की संख्या को नदी के प्रदूषण का मानदड माना गया।
* कमी, पुनर्चालन, पुनरूपयोग अपशिष्ट प्रबंध की नई धारणा है।
* स्रोत पर उपयोग कम करके, जहाँ संभव हो वहाँ पुर्चालन और पुनरूपयोग करके तथा कचरो का सही निष्पादन करके पर्यावरण को दूषित होने से बचाया जा सकता है
* ओऔद्योगिक क्रांति तथा जनसंख्या में वृद्धि के कारण प्राकृतिक संसाधन (जल, वन, वन्य जीव, कोयला, पेट्रोलियम आदि) क्षीण होने से हम सबों का ध्यान इनके संरक्षण एवं प्रबंधन की ओर आकृष्ट हुआ है।
* बन हमारे आर्थिक विकास के साधनमात्र ही नहीं, बल्कि प्राणियों के अस्तित्व बनाए रखने में सहायक होते हैं।
* वन कटाई से हरे पत्तों द्वारा कार्बन डाइऑक्साइड के अवशोषण (प्रकाश-संश्लेषण के लिए) की क्षमता घट जाती है। प्रकाश-संश्लेषण की दर घटने से पर्यावरण में ऑक्सीजन की कमी हो जाती है।
* चिपको आंदोलन पेड़ के काटे जाने के विरोध में किया गया था।
* वनों की सघनता घटने तथा उनके क्षेत्रफल के कम होने से वन्य प्राणी का जीवन संकट में है।
* जल का उपयोग सिंचाई, जल-बिद्युत उत्पादन, मत्स्यपालन, जल यातायात तथा उद्योग के लिए किया जाता है।
*बाँध हम सबको सिंचाई के लिए जल तथा बिजली उपलब्ध कराता है।
* वर्षाजल के सामान्य उपयोग के लिए, भूमिगत जल-स्तर को सामान्य बनाए रखने के लिए तथा जल के संरक्षण के लिए किए जानेवाले संग्रहण को जल संचयन कहते हैं।
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